पहला कदम: खुद संभाला मोर्चा
लद्दाख में चीनी सैनिकों की भारतीय जमीन पर अतिक्रमण करने के बाद शुरू हुए गतिरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मामले पर मोर्चा संभाला. वह लगातार देश के शीर्ष अधिकारियों से इस मामले पर जानकारी लेते रहे. पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल विपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की. इसमें उन्होंने मामले को जाना
भारत उस इलाके में एक सड़क बना रहा है. चीन नहीं चाहता कि भारत वहां कोई निर्माण कार्य करे. ऐसे में चीन लद्दाख में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा था. उसका मानना था कि भारत पीछे हटकर निर्माण कार्य रोक देगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भारत ने साफ कहा कि वह किसी कीमत पर निर्माण कार्य नहीं रोकेगा. भारत ने भी अतिरिक्त सैनिकों और तोपों की तैनाती कर अपनी उपस्थिति मजबूत की. भारतीय सेना ने अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए सैनिकों, वाहनों और तोपों सहित सैन्य तैनाती बढ़ा दी.
पांचवां कदम: ऑस्ट्रेलिया से समझौता
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साजोसामान (लॉजिस्टिक) सहयोग के उद्देश्य से एक दूसरे के सैन्य अड्डों तक आपसी पहुंच सुगम बनाने के महत्वपूर्ण समझौते सहित संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए छह अन्य समझौते किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन के ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद ये समझौते हुए. दोनों देशों के बीच हुए साझा लॉजिस्टिक सहयोग समझौते (एमएलएसए) के तहत सम्पूर्ण रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के अलावा दोनों देशों की मिलिट्री को मरम्मत और आपूर्ति बहाली के लिए एक दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग करने की बात कही गई है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए इस समझौते के कारण चीन की चिंता बढ़ सकती है. क्योंकि इसे चीन के खिलाफ रणनीतिक कदम माना जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया पहले से ही कोविड 19 के लिए चीन को जिम्मेदार बता रहा है.

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